Gyan Bhari Kahaniyan ! अंगों की कहानी

अंगों की कहानी
एक बार सभी अंग आपस मे बात कर रहे थे। मुह बोलै जरा देखो तो मैं कितना काम करता हूं। मै बात करता हु। कहना भी खाने में मदत करता हु। इतना सुन हाथ ने बोला खूब। अरे मैं भी तो बहुत कम करता हु। मै भी खाना खाने में मदद करता हूं। और ढेर सारा काम करता हु सो अलग । इतना सुन पैर बोलै मैं भी कम नही हु। मैं भी चलने और दौड़ने में मदद करता हूं।इतना सुन तभी तो बलवर्ग आकर खेलते हैं, पढ़ते हैं।
सबकी सुनते सुनते आँख गुस्सा होकर बोला बस मैं न
रहु तो तुम खेलते पढ़ते और काम करते रहे जाते और एक दूसरे को देको देखो गए कैसे।
अचानक उन्हें पेट की याद आई और सभी सोचने लगे इसका कोई काम नही है। हम खाना इसको देते हैं यह बैठे बैठे खाता है पोच कहि का।
अब सभी अंग सोचे हम पेट को काना नही देगे । अब पेट को खाना नही मिलने पर धीरे धीरे सभी अंग कमजोर होने लगे । तभी सबने जाना कि पेट ही खानों को पचाकर सभी अंगों को काम करने की शक्ति देती हैं।

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