Moral Story ! लालच का फल

लालच का फल
एक गांव में दो बहन थी। एक का नाम दुखिया और दूसरे के नाम सुखिया । दुखिया और सुखिया की शादी हो गई । दुखिया के शादी एक छोटे परिवार में हुआ जब कि सुखिया के शादी एक ऊँचे परिवार में हुआ । एक दिन दुखिया किसी कारणवश अपनी बहन के घर गई । सुखिया ने अपने बहन दुखिया से बोली यदि तुम
मेरे माथे से सारा ढील निकाल दो गई तो मैं तुम्हें दो सेर बेसन दूँगी । दुखिया में सुखिया के सारे माथे के ढील निकाल दी और दो सेर बेसन लेकर चाली गई ।
लेकिन एक ढील सुखिया के माथे में ही रह गया था ।

जिसे उसकी बेटी ने देख लिया और निकाल कर अपनी माँ को दिखा दिया। सुखिया ने अपने बेटी से कहा अभी जाओ और दुखिया से बेसन छीन कर लाओ। दुखिया अभी रास्ते मे ही होगी। लूटी पीटी दुखिया रोति हुई अपने घर गया रही थी । रास्ते मे उसे एक बनमानुस मिला । उसने पूछा मैं कैसा दिखता हु
दुखिया ने उसकी खूब तारीफ की । खुश होकर बनमानुस ने उसे बहुत सारा पैसा दिया और किसी को भी बताने से मन किया । लेकिन दुखिया ने अपनी बहन से बोल दिया कि मैं रास्ते से जा रही थी तो हमे एक बनमानुस से भेंट हुआ था और वह हमें ढेर सारा पैसा दिया । सुखिया ने यह बात सुनकर वह भी उसी रास्ते से गई । उसकी भी मुलाकात बनमानुस से हुआ।

बनमानुस से उससे पूछा मैं कैसे दिखी रहा हु । सुखिया ने बोल दिया कि बहुत ही खराब यह सुनकर बनमानुस तलवार निकाला और सुखिया का गर्दन काट दिया ।
इसी लिए बोला जाता हैं कि लालच का फल बुरा होता हैं।

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