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गुणवान पुत्र ! बच्चो की कहानियां ! Hindi Short Story With Moral

 

गुणवान पुत्र
एक शहर में एक गरीब आदमी रहता था। दिन भर वह सख्त मजदूरी करता था। उसके एक पुत्र था। उसने अपने पुत्र को खूब पढ़ाया। उसकी शादी की और अच्छे स्थान पर उसकी नौकरी लगा दी।
समय गुजरता गया लड़के ने खूब धन कमाया। उसने एक बड़ा मकान खरीद । लेकिन उसने अपने पिता के लिए उस मकान के पीछे बारे में एक छप्पर बनवाया। लड़का और उसकी बहु अपने पिता के साथ अच्छे बेवहार नही करते थे। उसके ओढ़ने बिछने एवं खाने पीने का ध्यान भी नही रखते थे। बेचारा गरीब आदमी कोई शिकायत भी नही करता था। पुत्र और पुत्रवधु को सुखी देखकर व भी खुश रहता था।
अब लड़के के घर पुत्र जन्म हुआ । बच्चा इतना सुंदर था कि किसी का भी नजर लग जाये। धीरे धीरे वह बड़ा हुआ। वह दादा जी को बहुत चाहता था। दादाजी के प्रेम को वह समझता था।
ठंडी के दिन थे। दादाजी अपने छप्पर के नीचे ठंडी में कांप रहे थे । बेटे ने ओढ़ने के लिए उन्हें कंबल दे रखा था , लेकिन वह फट गया था। दादाजी को कंपते देखकर पौत्र घर से अपना नया कंबल लेकर उन्हें देने के लिए निकल । लेकिन उसकी माँ ने उसे रोक दिया । पौत्र बोलो लेकिन दादाजी को बहुत ठंड लग रही हैं।
सुनकर माँ आँखे तरेरी और इशारे से उसे चुप रहने के लिए कहा।
पौत्र बड़ा होता गया । दादाजी के साथ उसके माता पिता के व्यहार से पौत्र को बहुत दुख होता था । एक दिन वह अपने पिता के कपड़े लिये, उन्हे फारा और उसे मिट्टी में सं कर उन्हें गंदा कर दिया । फिर उसने एक कमल लिया । उसे भी फार कर मैल कर दिया।
इन सभी को एक पोटली में बांधने लगा।
पिता ने यह देखकर कहा , अरे तुम क्या कर रहे हो होश में तो हो ।
पुत्र बोला पिताजी यह मैं आपके लिए तैयार कर रहा हूँ।दादाजी के तरह आप भी बूढ़े होंगे न। तब यह आपके काम आएगा । दादाजी भी ऐसे फटे और मैले कपड़े पहनते हैं। फाटा कबल ओढ़ते हैं और छप्पर के नीचे रहते है।
पौत्र के बात सुनकर पिता चन्तित में पेर गया। उसे मालूम हु की लड़का जो कुछ घर मे देखता है वे उसी के अनुसार करता है । उसकी पत्नी भी समझ गई कि दादाजी के साथ जो हमारा व्यहार है उसे देखकर ही उसके मन मे विचार आया। सचमुच हमने बहुत बड़ी गलती की है।
पत्नी पौत्र को लेकर दादाजी के पास गए । और दादाजी के चरण पकर के माफी मांगी। बहु रोने लगे
पौत्र बोला दादाजी पिताजी को माफ कर दिजीये आपने कितना कष्ट सहकार हमे पठाय लिखाया, पल पोसा लेकिन हमने आपके साथ बहुत बुरा व्यहार किया।
दादाजी बोले पौत्र और बहू तुम दोनों खुश रहो। भगवान तुम्हारे भला करे। ऐसा कोई काम मत करना जिससे हमारे पौत्र को दुख हो । यह बहुत गुणवान है
जौसे करोगे वैसे पयोगे।

2 thoughts on “गुणवान पुत्र ! बच्चो की कहानियां ! Hindi Short Story With Moral”

  1. Long time supporter, and thought I’d drop a comment.

    Your wordpress site is very sleek – hope you don’t mind
    me asking what theme you’re using? (and don’t
    mind if I steal it? :P)

    I just launched my site –also built in wordpress like yours– but the
    theme slows (!) the site down quite a bit.

    In case you have a minute, you can find it by searching for “royal cbd” on Google (would appreciate any feedback) – it’s still
    in the works.

    Keep up the good work– and hope you all take care of yourself
    during the coronavirus scare!

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