शौतन मेढ़क

शौतन मेढ़क
एक गांव में एक तोता और एक मेढ़क रहते थे दोनो
दोस्त थे एक दिन मेढ़क को रोटी खाने का मन किया।
मेढ़क तोता से बोला तुम कहि से आटा लेआदो मैं रोटी
बनुगा। और दोनों मिलकर खायेंगे । तोता आटा लिया
मेढ़क ने आये का एक रोटी बनाई। जब तोता ने रोटी मांगी तो मेढ़क को लालच हो गया । उसने बोला मैं एक रोटी तुम्हे कैसे दु । उसने यह कहकर उसने रोटी खा ली और तोता को भी कहा गया। अब मेढ़क को प्यास लगी वह कुवे के पास गया। वहा पनिभरे वाली से पानी पिलाने को बोली। पनभरनी ने पानी नही पिलाया। मेढ़क बोला
सात सेर के लिटि खाई
सुग्गा संग मिटी खाई
तोरा कहते केतना देर
इतना कह उसमे पनिभरणी को भी कहा लिया। और आगे बढ़ा तो उसने एक बरात को आते देख । उसने बरात को रोका । और बोला मैं दुल्हा बनुगा। बरती हसने लगे और मरने की बात की भीड़ मेढ़क ने गुस्सा होकर बोला
सात सेर के लिटि खाई
सुग्गा संग मिट्टी खाई
पनिभरणी वाली को खाई
तोरा खाते कतना देर
यह कहकर उसने सारी बरती को कहा ली। वहाँ से आगे बढ़ा तो उसे एक हाजम मिला। उसने कहा ये हाजम हमार दाढ़ी बना। हजाम हाँ हाँ आइये। जैसे ही मेढ़क दाढ़ी बनाने बैठा। हजाम ने उस्तीरा से उसकी पेट भर दिया। और एक एक कार के उसने सबको बाहर निकल। इस तरह मेढ़क की शौतानी का अंत हुआ।

Leave a Comment