म्यान का रंग

म्यान का रंग
दो राजा थे। खरख सिंह और कर्क सिंह दोनो में पुरानी दुश्मनी थी। बात बात पर दोनों की तलवारे एक दूसरे पर तन जाती थी। लेकिन दोनों रजयो की दुश्मनी नही पता थी। इस लिए निभाना जरूरी था।
दोनो रजयो के सेना और मंत्री इन बेवजह के झगड़े से
परेशान हो गये थे। एक दिन खरख सिंह और कर्क सिंह के मंत्री आपस मे मील उन्होंने दोनों दुश्मनी को खत्म करने की उपाय सोची। दोनो रजयो के सिमा के बीच एक पीपल के पेड़ था। दोनो ने किसी तरह दोनो रजयो को मिलने के लिए तैयार कर लिया।

जिस दिन दोनो राज्यों को मिलना था उस दिन दोनो राज्यों के मंत्री सुबह ही एक डाल पर एक कीमती म्यान लटका दी।
निश्चित समय पर कर्क सिंह और खरख सिंह पहुच गया। एक पीपल के इस तरफ अपने सिमा में तो दूसरी पीपल के पेड़ के उस तरफ दोनो पीपल के पेड़ टार पहुचे। दोनो ने एक दूसरे का अभिवादन किया फिर उसकी नजर के डाली पर लटके म्यान पर पड़ी।
खरख सिंह ने म्यान को देखकर बोला वाह कितना सुंदर म्यान है ।लाल रंग के इस म्यान पर चढ़े रत्न कितना खूबसूरती बढ़ा रहे है।
इतना सुन कर्क सिंह बोले क्या कह रहे हो खरख सिंह म्यान बहुमूल्य जरूर है लेकिन यह
सफेद रंग का है।
इतना सुन खरख सिंह गुस्सा हो गए और बोले क्या कह रहेहो तुम मुझे साफ साफ दिखाई रहा है की यह म्यान लाल रंग का है और इसपर रत्न चढ़े है।
इतना सुन कर्क सिंह गुस्सा हो कर ऊँचे स्वर में बोले लगता है कि तुम अंधे हो गए हो या दुश्मनी भुलाना नही चाहते हो मैं कह रहा हु म्यान सफेद है और इसपर मोती चढ़ा है।
मुझे लगता हैं कि तुम मुझे लड़ने के लिए बुलाये हो इतना कह खरख सिंह अपना तलवार निकल ली।

कर्क सिंह भी कहा पीछे हटने वाले थे वे भी तलवार निकल ली अब दिनों ने अपनी तलवार हवा में लहरी और लड़ने के लाले तैयार हो गए। वे जैसे ही लड़ने के लाये आगे बढे वैसे वह दोनों राज्यों के मंत्री पहुच गए।
बोले महराज रुकिए लड़ने से पहले हर पहलू के बारे में पता कर लेना चाहिए।
क्या मतलब दोनो राज्यो ने चौकर पूछा।

आप दोनों म्यान के कारण लड़ने पर उतर आए लेकिन आप दोनों तरफ से देखे तो लड़ने की कोई जरूरत ही न परे असफल में आप दोनों सही बोल रहे है । यह म्यान एक तरफ सी लाल और एक तरफ से सफेद है।
महमन्त्रियो ने आने अपने राज्यों को समझते हुए कहा
क्या दोनो राजा अचकित रह गए।
जी है लड़ाई अक्सर गलत फर्मी के ही वजह से होता
हैं यदि आप दोनों इस म्यान को जांच पड़ताल कर लेते तो यह नैबत नही न आती।
अब दोनो रजयो को अपनी अपनी गलती का यहस्स हुई उनको अपनी अपनी महामंत्री ओ की बात समझ मे आ गई। उस दिन के बाद दोनों ने प्रण कर लिया कि वह अब से कभी भी नही लड़ेगे।

इस तरह दोनो मंत्रियो की सूझ बूझ से दोनों राज्यो की पुरानी दुश्मनी खत्म हुई।

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