मैं पक्षी नही,मैं चुहा भी नही

मैं पक्षी नही,मैं चुहा भी नही
एक चमगादड़ था। एक पेड़ की डाली पेर वह उल्टा लटका रहता। एक दिन वह थका हुआ था, इसलिए डाल से छूटकर नीचे गिर गया।
पेड़ के नीचे एक नेवले का बिल था। चमगादड़ के गिरने की आवाज सुनकर नेवला बिल से बाहर निकल
उसने झपटकर चमगादड़ को पकड़ लिया। लेकिन चमगादड़ घबराया नही । उसने नेवले से विनती की , मेहरबानी करके मुझे मरना मत।
नेवला बोलै क्यो पक्षी तो नेवले का भोजन होता हैं । अब मैं तुझे छोरुगा नही ।
चमगादड़ बहुत छलक था । उसने कहा लेकिन मैं पक्षी नही हु । उड़ता हु तो क्या हुआ। क्या मैं चूहे जैसा नही लगता मैं तो चुहा ही हु।
हाँ तुम लगते तो चूहे जैसे हो । जाओ मैं तुझे छोड़ देता हूं। नेवले ने उसे जाने दिया।
कुछ दिन के बाद चमगादड़ रात में उड़ते उड़ते फिर जमीन पर गिर पड़ा। नीचे एक दूसरा नेवला बैठा था । उसने चमगादड़ को पाकर लिया।चमगादड़ ने हिम्मत से कहा,भैया नेक बनो और मुझे मारो मात।
नेवला बोला , क्यो ? नेवले और चूहे में तो वैर है । मैं तुम्हे क्यो छोर दू।
चमकदार ने हिम्मत करके कहा, लेकिन मैं चुह नाही हू। मैं बिल में नही रहता हूं मैं तो पेड़ के उच्ची डाली पर लटकता हु । और पक्षी की तरह उड़ता हु।वास्तव में मैं पक्षी हू।
नेवला बोला , हाँ तुम पक्षी ही लगते हो। मैं तुम्हे जाने देता हूं।

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