एक रानी थी

एक रानी थी। वह रोटी बनक रही थी। रोटी फूलने के लिए जिसे कपड़ा उठाया वैसे ही रोटी भाग गई । और बोली मुझे पकड़ो तो जनु। रोटी बहुत दूर चली गई । रास्ते मे उसे एक शेर मिला । रोटी बोली शेर भीई ,शेरनी भाई तू मुझे नही खाओगे। खाली शहद ही पीते रहोगे। शेर रोटी खाने चली वैसे ही रोटी भाग गई।
और बोली मुझे पकड़ो तो जनु। वह भर से भाग गया।
उसे भीर रास्ते मे एक कौआ मिला । और कौआ ने रोटी और लोमड़ी
रोटी को चोच में पकर लिया।रोटी बोली कौआ भाई
तुम तो मुझे बहुत अच्छे लगते हो।और सुने है तुम बहुत अच्छे गेट भी हो । इन सब बात सुनकर कौआ ने जैसे मुह खोल वैसे रोटी गिर गई और रोटी भर से भाग गई। भीर रास्ते मे उसे एक नदी मिली रोटी ने सोचा इस पर इस है तो उस पार कैसा होगा।वह सोच ही रह था । वैसे ही उसे लोमड़ी मिली। लोमड़ी बोली चलो रोटी मैं तुम्हे उस पर ले चलूंगी । रोटी बोली नही तुम मुझे खाजोगे। लोमड़ी बोली नही मैं तुम्हे नही कहूंगी ।
तुम मेरे पूछ पर बैठ गाओ। रोटी उसकी पूछ पर बैठ गई । लोमड़ी जैसे ही पानी मे उतरी वैसे रोटी डूबने लगी। रोटी बोली मैं डूब रही हु । लोमड़ी बोली तुम मेरे
सिर पर बैठ जाओ। रोटी उसके सिर पर बैठ गई ।फिर लोमड़ी आगे बढ़ी रोटी फिर से डूबने लगे। फिर लोमड़ी बोली तुम मेरे नाक पर बैठ जाओ रोटी उसके नाक पर बैठ गई। थोड़ी दूर जाने के बाद रोटी फिर से डूबने लगा । फिर से लोमड़ी बोली तुम मेरे मुह पर बैठ जाओ । जैसे ही रोटी लोमड़ी के मुह पेर बैठी वैसे ही लोमड़ी रोटी खा ली।

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